नई दिल्ली | वैश्विक व्यापारिक तनावों के बीच चीन ने भारत से यह आश्वासन मांगा है कि चीन से आयात किए जा रहे दुर्लभ पृथ्वी (Rare Earth) मैग्नेट्स को किसी तीसरे देश, विशेष रूप से अमेरिका को पुनः निर्यात (Re-export) नहीं किया जाएगा और इनका उपयोग सिर्फ घरेलू उद्योगों के लिए ही किया जाएगा।

🌏 पृष्ठभूमि: क्यों है यह मुद्दा महत्वपूर्ण
चीन दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ तत्वों का उत्पादक और निर्यातक देश है। ये तत्व इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए बेहद अहम हैं।
भारत के लिए ये मैग्नेट्स उसके बढ़ते हुए EV और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ हैं।
हाल के महीनों में चीन ने इन सामग्रियों के निर्यात पर नए नियंत्रण नियम लागू किए हैं, जिनका कारण उसने राष्ट्रीय सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा बताया है।
⚙️ चीन की नई शर्तें
टाइम्स ऑफ इंडिया और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारतीय कंपनियों से एंड-यूज़ सर्टिफिकेट (End-Use Certificate) की मांग की है और यह भी कहा है कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- ये मैग्नेट्स किसी अन्य देश को निर्यात नहीं किए जाएंगे,
- इनका उपयोग रक्षा परियोजनाओं में नहीं होगा, और
- इनका प्रयोग केवल भारत के औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
हालांकि कुछ भारतीय कंपनियों ने पहले ही यह प्रमाणपत्र दे दिया है, लेकिन चीन अतिरिक्त गारंटी और लिखित आश्वासन चाहता है ताकि भारी रेयर अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति को फिर से शुरू किया जा सके।
🇮🇳 भारतीय उद्योग पर असर
इस स्थिति के कारण भारत के कई क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ रहा है:
- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण,
- उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स,
- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं,
- रक्षा उत्पादन।
भारत अपनी 85% से अधिक मैग्नेट आवश्यकता चीन से पूरी करता है। सरकार अब घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नए प्रोत्साहन (Incentive) योजनाओं पर विचार कर रही है और जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
🌐 भूराजनीतिक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
इससे अमेरिका को अप्रत्यक्ष रूप से तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में सीमित समर्थन मिल सकेगा।
भारत के लिए चुनौती यह है कि वह औद्योगिक आवश्यकताओं और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए रखे।
🗣️ आधिकारिक स्रोत
“हम भारत से एंड-यूज़ आश्वासन चाहते हैं ताकि रेयर अर्थ सामग्री का गलत उपयोग या अन्य देशों को निर्यात रोका जा सके,” — टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक चीनी अधिकारी के हवाले से कहा गया।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वह आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए चीनी अधिकारियों से बातचीत कर रहा है।
📈 निष्कर्ष
भारत और चीन के बीच यह नया विवाद दिखाता है कि दुर्लभ पृथ्वी खनिज अब नई सदी के तेल की तरह बनते जा रहे हैं।
जैसे-जैसे देश स्वच्छ ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों की ओर बढ़ रहे हैं, इन खनिजों पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक कूटनीति और व्यापार नीति को प्रभावित करेगा।
🔗 स्रोत:
टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स, रॉयटर्स, और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट्स पर आधारित।